व्याख्यान एवं प्रदर्शन

महाविद्यालयों में व्याख्यानों की शृंखला

पिछले क्रियाएँ

संस्कृति और लोकतंत्र

पिछले क्रियाएँ

लोकतंत्रशाला देश के विभिन्न इलाक़ों के कलाकारों और शिल्पकारों के साथ मिलकर लोकतंत्र, धर्म-निरपेक्षता, और समानता जैसे विचारों को कला और संस्कृति के माध्यम से तलाशने के उद्देश्य से कार्यशालाएँ, व्याख्यान और प्रस्तुतियाँ आयोजित करती रहती है। इन साझेदारियों के माध्यम से हम लोकतांत्रिक प्रशासन के एक अहम साधन के तौर पर कला और संस्कृति को समझने की कोशिश भी करते हैं।

स्मृति व्याख्यान

पिछले क्रियाएँ

  • सैन्य एवं सुरक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता पर पार्था कुमार डे स्मृति वार्षिक व्याख्यान

 

एयर मार्शल पार्था कुमार डे (बाबी डे) बेहतर निर्णय लेने के साधन के रूप में पारदर्शिता, संवाद और बहस को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते थे। उनकामानना था कि पूर्ण गोपनीयता हमेशा एक कमज़ोरी होती है और इसलिए ज़रूरी है कि ऐसे क्षेत्रों का चयन किया जाए जहाँ पारदर्शिता को बढ़ावा देकरबेहतर एवं प्रभावी प्रबंधन और मज़बूत एवं सुरक्षित राष्ट्र की ओर बढ़ा जाए। उनका यह भी विश्वास था कि सैन्य सेवाओं का असल मक़सद तो ‘शांति’ स्थापित करना है।
एक लोकतांत्रिक देश में राष्ट्रवाद, सुरक्षा और सैन्य मुद्दों पर खुली बहस और चर्चा उतनी ही ज़रूरी है जितनी विकास और राजनीति के मुद्दों पर। इनचर्चाओं से एक राष्ट्र अपने सुरक्षा सम्बंधी मुद्दों को कैसे देखता है इसका एक परिपक्व, सुगढ़ और प्रभावी ढाँचा उभर सकता है। हमें उम्मीद है किव्याख्यानों की इस शृंखला से ‘विशेषज्ञों’ और नागरिकों के बीच एक सार्वजनिक संवाद क़ायम हो पाएगा और ज्ञान की एक ऐसी पूँजी विकसित हो पाएगीजोकि बेहतर नीति-निर्माण और एक पारदर्शी, सुरक्षित और आत्म-विश्वासी राष्ट्र बनाने में सहायक होगी।
ये स्मृति व्याख्यान लोकतंत्रशाला एवं एयर मार्शल पार्था कुमार डे के परिवार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किए जाते हैं।
पहला पार्था कुमार डे स्मृति व्याख्यान अप्रैल 2, 2016 को एडमिरल रामदास द्वारा इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ह्यूमन सेटल्मेंट्स (IIHS), बैंगलोर में दियागया जिसका विषय था — ‘लोकतांत्रिक ढाँचे में सुरक्षा और असुरक्षा पर चर्चा: सैन्य क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही’।
दूसरा स्मृति व्याख्यान 13 मार्च 2017 को वजाहत हबीबुल्लाह द्वारा IIHS बैंगलोर में ही दिया गया जिसका विषय था—‘सूचना का अधिकार एवं राष्ट्रीयसुरक्षा: अंतर्विरोध या संगम’।

  • अजित भट्टाचार्जी स्मृति व्याख्यान

अजित भट्टाचार्जी जिन्हें प्यार से ‘अजित दा’ के नाम से बुलाया जाता रहा, एक वरिष्ठ पत्रकार थे। उनका जन्म शिमला में हुआ और उनकी महाविद्यालयीशिक्षा दिल्ली के सेण्ट स्टीफ़न्स से हुई। वे ना सिर्फ़ एक जाने-माने और सम्मानित पत्रकार एवं हिंदुस्तान टाइम्ज़, टाइम्ज़ ऑफ़ इंडिया, दी इंडियनएक्सप्रेस जैसे बड़े अख़बारों के सम्पादक रहे बल्कि उन्होंने 1996 में मध्य राजस्थान से शुरू हुए सूचना के अधिकार अभियान को आगे बढ़ाने में भीअहम भूमिका निभाई। वे जयप्रकाश नारायण के “एवरी मैन’स वीक्ली” के भी सम्पादक रहे। वे 1995 से 2004 तक प्रेस इंस्टिट्यूट के निदेशक भी रहेऔर ताउम्र वंचित भारतीयों के हक़ों के पक्ष में खड़े रहे।
पहला अजित भट्टाचार्जी स्मृति व्याख्यान श्री गोपाल गांधी द्वारा 1 फ़रवरी, 2013 को जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में दिया गया। इसका विषय स्वाधीनभारत में नेतृत्व के मुद्दे से जुड़ा था जिसका शीर्षक था— ‘नेता, नेतृत्व और नेतागिरी’।

 

Prabhash Joshi Memorial
Lecture

Once a year

Past Activities

Babi Dey Memorial
Lecture

Once a year

Past Activities

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