Meeting and Convention

जन-संसद

जन-संसद का विचार ज़मीनी स्तर पर एक संवाद स्थापित करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराने का है। जन-संसद के लिए अमावस्या के दिन को चुना गया है जोकि ग्रामीण भारत में मज़दूरों के लिए अक़्सर आराम का दिन होता है और इस दिन बिना अपना काम छोड़े वे इस संसद में शामिल हो सकें। लोकतंत्रशाला की ओर से लोगों को बुलावा भेजा जाता है कि वे हमारे परिसर में एकत्र होकर सामयिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा करें। इन जन-संसदों में सूचना के अधिकार और नरेगा जैसे क़ानूनों के कार्यन्वयं, स्थानीय स्व-प्रशासन में महिलाओं की भूमिका, राजनैतिक विचारधाराएँ और चुनावी घोषणा-पत्र, विकास और अन्य कई ऐसे मुद्दों पर चर्चाएँ हो चुकी हैं। जन-संसद लोकतंत्रशाला के मुख्य मीटिंग हॉल ‘चिंतन’ में आयोजित होती हैं जिसे इस प्रकार बनाया गया है कि वहाँ बैठने और बोलने वाले सभी लोग एक बराबरी के साथ ही बैठते हैं और अपनी बात रखते हैं।

युवा संवाद

The idea of Jan Sansad is to provide a catalyst for dialogue at the grassroots level. Jan Sansad is proposed to be held every month on Amavasya, a day of rest in rural India, so that people can attend without losing their livlihood. Invitations are sent to people to gather at Loktantrashala to discuss a topic of current interest. Jan Sansads have discussed implementation of Right to Information, the National Rural Employment Guarantee Act and the role of women in local self government, political ideologies and election manifestos, development and many more such issues. It is held in Loktantrashala’s main meeting hall, a circular dome shaped building whose circular design ensures that people sit facing each other, embodying the concept of equality in speech.

लोकतंत्र के उत्सव

लोकतंत्रशाला पूरे साल लोकतांत्रिक महत्व के दिनों को बड़े उत्साह से मनाती है।

गणतंत्र दिवस

इस दिन राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के साथ-साथ एक लोकतांत्रिक विमर्श की प्रेरणा। आस-पास के गाँवों से बच्चे और अन्य लोग इस दिन हमारे परिसर में आते हैं। बच्चे देशभक्ति के गीत गाकर, कविता-पाठ और चित्रकारी कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। आस-पास के विद्यालयों के शिक्षक और अन्य गणमान्य नागरिक भी इस समारोह में हिस्सा लेकर बच्चों का उत्साहवर्धन करते हैं।

संविधान दिवस

26 नवम्बर 1949 को स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अंगीकृत और आत्मर्पित किया था और इसी दिन 1930 में ‘पूर्ण स्वराज’ का नारा भी इंडीयन कांग्रेस ने दिया था। अतः इस दिन को हम ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाते हैं। रैली और नुक्कड़ नाटकों के ज़रिए हम इस दिन लोगों को उनके संवैधानिक हक़ों के प्रति जागरूक करते हैं और सब साथ मिलकर संविधान के पालन और उसे बचाए रखने की शपथ भी लेते हैं।

अम्बेडकर जयंती

14 अप्रैल को बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर की स्मृति में हम उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन परिसर में जन-संसद का आयोजन होता है जिसमें आस-पास के गाँवों से कई लोग और दलित संगठनों के कई प्रतिनिधि और युवा शामिल होते हैं। इस दिन हम बाबा साहब के विचारों और आदर्शों का पालन करने और न्याय और समानता पर आधारित एक समाज की स्थापना करने का वचन लेते हैं।

स्वतंत्रता दिवस

15 अगस्त 1947 के दिन भारत ने संप्रभुता हासिल की और इस दिन से भारत देश और उसके नागरिकों के बीच एक नए सामाजिक समझौते की नींव भी रखी गयी। स्वतंत्रता दिवस के दिन हम आज़ादी का जश्न मनाने के साथ-साथ युवा लोगों के साथ मिलकर इस बात पर भी विचार करते हैं कि आख़िर आज़ादी के सही मायने क्या हैं? और हम वाक़ई कितने आज़ाद हैं? ध्वज-आरोहण के लिए परिसर के आस-पास के गाँवों से बच्चे पूरे उत्साह से शामिल होते हैं। और इस दिन हम असाक्षरता, भूख और ग़रीबी आदि से आज़ादी का प्रण भी लेते हैं। साथ ही बच्चे कई तरह के खेलों में भी शामिल होते हैं।

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