प्रशिक्षण

प्रशिक्षणों का उद्देश्य सीखने वालों की ज़रूरत के मुताबिक़ नियत जानकारी, ज्ञान और कुशलताएँ। लोकतंत्रशाला विभिन्न अधिकार-आधारित क़ानूनों पर प्रशिक्षण-कार्यक्रम आयोजित करती रहती है, जैसे – सूचना का अधिकार, महात्मा गांधी नरेगा, सामाजिक अंकेक्षण, सुनवाई का अधिकार आदि। सीखने वाले ग्रामीण और शहरी भारत के विभिन्न इलाक़ों… ।

सूचना का अधिकार

पिछले क्रियाएँ

2005 में बना सूचना का अधिकार क़ानून भारत में सबसे ज़्यादा काम लिए जाने वाले क़ानूनों में से एक है। हालाँकि, इसके बारे में जागरूकता बढ़ाकर आम नागरिकों को उनके सूचना के अधिकार का प्रयोग करने में सक्षम बनाने के लिए काफ़ी कुछ किए जाने की ज़रूरत है। सूचना के अधिकार क़ानून पर दो-दिवसीय प्रशिक्षण एक तरह से प्रशिक्षकों की शिक्षा के लिए है जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता भाग लेते हैं। यह प्रशिक्षण उन ज़मीनी कार्यकर्ताओं पर केंद्रित होता है जो पहले से ही सूचना के अधिकार क़ानून का इस्तेमाल कर रहे हैं और वे इसे और प्रभावशाली तरीक़े से काम में कैसे लें इसका प्रशिक्षण चाहते हैं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह है कि कार्यकर्ताओं को सूचना के अधिकार क़ानून के अहम प्रावधानों से परिचित कराते हुए उन्हें अपने सवाल इस तरह तैयार करना सिखाया हे ताकि वे सरकारी एजेन्सियों से अधिकाधिक सूचना प्राप्त कर सके।

प्रशिक्षण के ज़रिए हम यह भी प्रयास करते हैं कि कार्यकर्ताओं को सूचना के अधिकार क़ानून की धारा 4 के तहत प्रो-ऐक्टिव डिस्क्लोज़र (यानी) की महत्ता से भी परिचित कराएँ और इस महत्वपूर्ण प्रावधान की ब्लॉक और ज़िला स्तरों पर ठीक से निगरानी करें। अगर धारा 4 के प्रावधानों का ठीक से पालन हो तो रोज़मर्रा के सरकारी कामकाज की जानकारी बिना किसी RTI आवेदन के लोगों को मिल सकती है और सरकार और आम लोगों के बीच सूचना के आदान-प्रदान की एक संस्कृति पनप सके।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून (MGNREGA)

पिछले क्रियाएँ

सामाजिक अंकेक्षण

पिछले क्रियाएँ

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून, 2005 ग्रामीण क्षेत्रों में ग़रीब लोगों को साल में 100 दिन का अकुशल रोज़गार उपलब्ध कराने की गारंटी देकर उनकी आजीविका की सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाया गया। पिछले कुछ अरसे में मनरेगा ग्रामीण ग़रीब लोगों को रोज़गार देने वाला सबसे बड़ा कार्यक्रम रहा है।लोकतंत्रशाला ने 13 और 14 अगस्त 2016 को नरेगा के मैनज्मेंट इन्फ़र्मेशन सिस्टम (MIS) पर एक कार्यशाला आयोजित की। नरेगा का MIS आम लोगों की पहुँच के मुताबिक़ सबसे पारदर्शी और व्यापक जानकारी प्रदान करने वाला है। और इसीलिए ये ज़रूरी हो जाता है कि इसे आम लोगों की मदद करने में अधिकाधिक इस्तेमाल किया जाए। इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को कम्प्यूटर चलाने सम्बंधी बुनियादी जानकारी देने के साथ-साथ नरेगा के MIS से उपयोगी जानकारी निकालने की भी हैंड्ज़-आन ट्रेनिंग दी गयी ताकि राजस्थान भर में ये लोग नरेगा सहायता केंद्रों की स्थापना और संचालन कर सकें।

Read more

सामाजिक अंकेक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें नागरिक सरकार के साथ मिलकर किसी योजना, कार्यक्रम, नीति या क़ानून के कार्यन्वयं और प्रभाव का मूल्याँकन कर सकें। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून की धारा 17 के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर किसी योजना के तहत किया गए कामों का हर छः महीनों में स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण किया जाना चाहिए। और यह किसी तीसरी संस्था द्वारा होना चाहिए।

सामाजिक अंकेक्षण प्रशिक्षण का उद्देश्य सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों और अन्य इच्छुक लोगों को सरकारी अधिकारियों को जवाबदेह बनाने में सामाजिक अंकेक्षण की भूमिका के बारे में बताना है। और ये समाज में जागरूकता बढ़कर किया जाएगा। नरेगा और सामाजिक कल्याण की अन्य योजनाओं के तहत सामाजिक अंकेक्षण का प्रभावी कार्यन्वयं लक्षित नागरिकों को उनके लाभ ठीक से पहुँचाने में बहुत अहम भूमिका निभाता है।प्रशिक्षण के अंत तक यह उम्मीद होती है कि प्रतिभागी स्वयं ही सीखने की शुरुआत कर देंगे और सामाजिक अंकेक्षण की एक बुनियादी समझ के साथ इस सीखने की प्रक्रिया को जीवित रखेंगे। और यह भी उम्मीद होती है कि प्रतिभागियों को इतनी जानकारी हो जाएगी कि वे जागरूकता बढ़ा सकें और अपने इलाक़े में ही सही लेकिन सरकारी एजेंसियों से सही सवाल पूछ सकें और जवाब माँग सकें।

प्रशिक्षण के अंत तक प्रतिभागी यह जान लें –

  • • वे सामाजिक अंकेक्षण प्रक्रिया के नियम, भागीदार और अलग-अलग चरणों को अच्छे से समझ सकें।
  • • वे विभिन्न सामाजिक योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण करने की दक्षता हासिल कर सकें।

युवा प्रशिक्षण

पिछले क्रियाएँ

फ़रवरी 2013 में लोकतंत्रशाला ने राजनैतिक जागरूकता और सामाजिक कार्य पर युवाओं के लिए एक प्रशिक्षण का आयोजन किया। परिसर के आस-पास के इलाक़ों से कई युवाओं ने इस प्रशिक्षण में भाग लिया। इस प्रशिक्षण को इस तरह रचा गया था कि युवाओं से देश के वर्तमान राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य के बारे में उनकी सोच को समझा भी जाए और उन्हें जागरूक भी किया जाए। इस प्रशिक्षण में कई विषय शामिल थे, जैसे – एक संविधान की ज़रूरत को समझना, लोकतंत्र का मतलब, मूल अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी, नीति-निर्माण के लिए नीति-निर्देशक तत्व, भारतीय राजनीति के भौगोलिक-राजनैतिक आयाम, जाति की भूमिका का विश्लेषण, हमारे समाज और राजनीति में धर्म और वर्ग, नरेगा, सूचना का अधिकार और सुनवाई के अधिकार जैसे क़ानूनों को समझना आदि। सामाजिक आंदोलनों पर काफ़ी अहम चर्चाएँ भी हुईं और इनकी ज़रूरत और इनके अंदर की राजनीति पर भी। लिंग-आधारित हिंसा और दलित अत्याचार पर भी चर्चा हुई। साथ ही इस दौरान प्रतिभागियों को कठपुतली चलाना, गीत और नाटक का इस्तेमाल कर सरकारी योजनाओं, और अन्य सामाजिक-राजनैतिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का भी प्रशिक्षण दिया गया।

बेसिक कम्प्यूटर प्रशिक्षण

पिछले क्रियाएँ

लोकतंत्रशाला ने अपने परिसर में डिजिटल एमपावर्मेंट फ़ाउंडेशन (DEF) के सहयोग से एक कम्प्यूटर साक्षरता कार्यक्रम गाँव के बच्चों, विद्यार्थियों और युवाओं के लिए चलाया। विचार यह था कि युवाओं और बच्चों की तात्कालिक ज़रूरतों को देखते हुए उन्हें कम्प्यूटर जैसी ट्रेनिंग भी दी जाए और साथ ही उन्हें संविधान, सूचना का अधिकार आदि विषयों से भी परिचित कराया जाए। बाद में इस कम्प्यूटर साक्षरता कार्यक्रम को पास के सरकारी विद्यालयों में भी चलाया गया ताकि ग़रीब ग्रामीण परिवारों के बच्चों को इसका लाभ मिल सके।

मैं भाग लेने के लिए इच्छुक हूं|

 
Powered by ARForms   (Unlicensed)